सूरह अलम नशरह की मुख्तसर तफ्सीर

(इस सूरह में नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अच्छे सिफात ज़िक्र किए गए हैं)

‘‘ऐ नबी! क्या हमने तेरा सीना नहीं खोल दिया? (यकीनन हमने तेरा सीना खोल दिया) और तुझपर से तेरा बोझ हमनें उतार दिया, जिसने तेरी पीठ बोझल कर दी थी। और हमने तेरा ज़िक्र बुलंद कर दिया। पस मुश्किल के साथ आसानी है। बेशक मुश्किल के साथ आसानी है। पस जब तु फारिग़ हो तो इबादत में मेहनत कर और परवरदिगार ही की तरफ दिल लगा।

यह मक्की सूरत है, इसमें 8 आयात हैं, इब्तिदाई चार आयात में नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन अच्छे सिफात बयान किए गए हैं।

  1. हमने तेरे सीने को खोल दिया- यानी हमने तेरे सीने को मुनव्वर कर दिया, इसमें उलूम व मआरिफ के समुन्दर उतार दिए और लवाज़िमे नबूवत और फराएज़े रिसालत बर्दाशत करने के लिए बड़ा वसी हौसला दिया। इस आयत से शक्के सदर भी मुराद लिया गया है जो दो मर्तबा नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ पेश आया। एक मर्तबा बचपन में और दूसरी मर्तबा मेराज की रात में। शक्के सदर में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सीना मुबारक चाक करके दिल निकाला गया, उसे आबे ज़मज़म से धोकर अपनी जगह पर रख दिया गया और उसे ईमान व हिकमत से भर दिया गया।

(2) तुझपर से तेरा बोझ हमने उतार दिया- जिसने तेरी पीठ बोझल कर दी थी। यानी मनसबे रिसालत की ज़िम्मदारियों को महसूस करके आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर गेरानी गुज़रती होगी वह दूर कर दी गई। या “बोझ” से वह जाएज़ उमूर मुराद हैं जो घड़ी घड़ी आप करीने हिकमत व सवाब समझ कर लेते थे और बाद में इनका खिलाफे हिकमत या खिलाफे अवला होना जाहिर होता था और आप बवजह उलूवे शान और गायते कुरूब के इससे एसे मगमूम होते थे जिस तरह कोई गुनाह से मग़मूम होता है तो इस आयत में मुवाखज़ा न होने की बशारत दी गई। अल्लाह तआला ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अगले पिछले सारे गुनाह माफ फरमा दिए थे। नबूवत से पहले 40 साला जिन्दगी में भी अल्लाह ने आपको गुनाहों से महफूज़ रखा था।

(3) और हमने तेरा ज़िक्र बुलंद कर दिया- हज़रत मुजाहिद (रज़ियल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं यानी जहां मेरा (अल्लाह का) ज़िक्र किया जाएगा वहां तेरा (नबी का) भी ज़िक्र किया जाएगा। जैसे “मैं गवाही देता हूं कि नहीं है कोई माबूद सिवाए अल्लाह कि और मैं गवाही देता हूं कि मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।” हज़रत क़तादा (रज़ियल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं कि दुनिया और आखिरत में अल्लाह तआला ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ज़िक्र बुलंद किया, कोई खतीब, कोई नसीहत करने वाला, कोई कलमा पढ़ने वाला, कोई आज़ान देने वाला, कोई नमाज़ी ऐसा नहीं जो अल्लाह की वहदानियत के साथ आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की रिसालत का कलमा न पढ़ता हो। गरज़ ये कि दुनिया और आखिरत दोनों जहां में अल्लाह तआला ने आप सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम का ज़िक्र बुलंद फरमाया।

पांचवीं और छठी आयत में एक उसूल बयान किया गया कि दुशवारी के बाद अल्लाह तआला की तरफ से आसानी मिलती है।

आखरी दो आयात में अल्लाह तआला ने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फरमाया ऐ नबी! जब तू फारिग़ हो तो इतनी इबादत कर कि तू थक जाए। यानी नमाज़, तबलीग, जिहाद और दुआ वगैरह में इतना मशगूल हो कि तू थक जाए और अपने परवरदिगार ही की तरफ दिल लगा।

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)