بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيْم
اَلْحَمْدُ لِلّهِ رَبِّ الْعَالَمِيْن،وَالصَّلاۃ وَالسَّلامُ عَلَی النَّبِیِّ الْکَرِيم وَعَلیٰ آله وَاَصْحَابه اَجْمَعِيْن۔

जुमा के दिन ईद होने पर नमाज़े जुमा भी अदा की जाए
बाज हजरात मसाइल से पूरी तरह वाकफियत के बेगैर गलत मालूमात लोगों को देते हैं जिनसे आम मुसलमान सिर्फ खलफशारी का शिकार होते हैं, मसलन हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के असल अमल के बर खिलाफ आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ से मिली इजाजत को बाज हजरात इस तरह ब्यान करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अमल को जिक्र किए बेगैर कहा जाता है कि अगर जुमा के दिन ईद हो जाये तो जुमा की नमाज़ के बजाये जुहर की नमाज़ अदा की जाये। हालांकि मसअला सिर्फ इतना है कि जो हजरात दूर दराज इलाकों से नमाज़े ईद पढ़ने के लिए आते हैं तो उनके लिए नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इजाजत दी है कि वह नमाज़े ईद से फारिग हो कर अगर अपने घर जाना चाहें तो चले जायें, फिर वह अपने घरों में जुहर के वक्त में नमाज़े जुहर अदा कर लें। लेकिन जो हजरात नमाज़े जुमा में हाजिर हो सकते हैं वह नमाज़े जुमा ही अदा करें चुनांचे हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जुमा के दिन ईद होने पर ईद की नमाज़ के बाद नमाज़े जुहर का वक्त होने पर जुमा की नमाज़ ही पढ़ाई और सहाबा ने जुमा ही की नमाज़ पढ़ी। हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अमल के मुताबिक उम्मते मुस्लिमा 1400 साल से जुमा के दिन ईद होने पर दोनों नमाजें यानी ईद और जुमा जमात के साथ पढ़ती आ रही है। लिहाजा हमें हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के असल अमल की ही दूसरों को तालीम देनी चाहिए और वह यह है कि जुमा के दिन ईद होने पर ईद की नमाज़ के बाद जुहर के वक्त में जुमा की नमाज़ अदा करें अगरचे दूर दराज इलाकों से आने वाले लोग अपने घरों में जा कर जुहर की नमाज़ अदा कर सकते हैं। हिन्द व पाक के जमहुर उलमा का भी यही मौकिफ है। सउदी अरब के उलमा ने भी वजाहत के साथ लिखा है कि जिन मसाजिद में नमाज़े जुमा अदा की जाती है वहां जुमा के दिन ईद होने पर जुहर नहीं बल्कि जुमा की ही नमाज़ अदा की जाये और जिन मसाजिद में नमाज़े जुमा अदा नहीं होती वहां नमाज़े जुहर की जमात का एहतिमाम न किया जाये। मस्जिदे हराम और मस्जिदे नबवी में भी जुमा के दिन ईद होने पर ईद और जुमा दोनों नमाजें जमात के साथ अदा की जाती है।
हमारी तरफ से ईदुल फित्र की मुबारकबाद कबूल फरमाईये। अल्लाह तआला हमारे नेक आमात को कबूल फरमाए। आमीन

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)