क़ुर्बानी की तारीख

हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम को ख्वाब में दिखाया गया कि वह अपने बेटे (इसमाईल अलैहिस सलाम) को ज़बह कर रहे हैं। नबी का ख्वाब सच्चा हुआ करता है, चुनांचे अल्लाह तआला के इस हुकुम को पूरा करने के लिए हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम फलस्तीन से मक्का पहुंच गए। जब बाप ने बेटे को बताया कि अल्लाह तआला ने मुझे तुम्हें ज़बह करने का हुकुम दिया है तो फरमांबरदार बेटे इसमाईल अलैहिस सलाम का जवाब था अब्बाजान! जोकुछआपकोहुकुमदियाजारहाहैउसेकरडालिए।इंशाअल्लाहआपमुझेसब्रकरनेवालोंमेंपाएंगे।” (सूरह साफ्फात 102) बेटे के इस जवाब के बाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम अपने बेटे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम को जब मक्का से ज़बह करने के लिए लेकर चले तो शैतान ने मिना में तीन जगहों पर उन्हें बहकाने की कोशिश की, जिस पर उन्होंने सात सात कंकड़ियां उसको मारीं जिसकी वजह से वह ज़मीन में धंस गया। आखिर रज़ाए इलाही की खातिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अपने दिल के टुकड़े को मुंह के बल ज़मीन पर लिटा दिया, छुरी तेज की, आंखों पर पट्टी बांधी और उस वक़्त तक छुरी अपने बेटे के गले पर चलाते रह जब तक अल्लाह तआला की तरफ से यह आवाज़ गई इब्राहीम! तूनेख्वाबसचकरदिखाया, हमनेकलोगोंकोऐसाहीबदलादेतेहैं।” (सूरह साफ्फात 107) चुनांचे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम की जगह जन्नत से एक मेंढा भेज दिया गया जिसे हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम ने ज़बह कर दिया। इस वाक़्या के बाद से अल्लाह तआला की रज़ा के लिए जानवरों की क़ुर्बानी करना खास इबादत में शुमार हो गया, चुनांचे हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत के लिए भी हर साल क़ुर्बानी सिर्फ मशरू की गई बल्कि इसको इस्लामी शेआर बनाया गया और हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम की इत्तिबा में हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीकों पर जानवरों की क़ुर्बानी का यह सिलसिला कल क़यामत तक जारी रहेगा इंशाअल्लाह।

 

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)

क़ुर्बानीकीतारीख

 

हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम को ख्वाब में दिखाया गया कि वह अपने बेटे (इसमाईल अलैहिस सलाम) को ज़बह कर रहे हैं। नबी का ख्वाब सच्चा हुआ करता है, चुनांचे अल्लाह तआला के इस हुकुम को पूरा करने के लिए हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम फलस्तीन से मक्का पहुंच गए। जब बाप ने बेटे को बताया कि अल्लाह तआला ने मुझे तुम्हें ज़बह करने का हुकुम दिया है तो फरमांबरदार बेटे इसमाईल अलैहिस सलाम का जवाब था अब्बाजान! जोकुछआपकोहुकुमदियाजारहाहैउसेकरडालिए।इंशाअल्लाहआपमुझेसब्रकरनेवालोंमेंपाएंगे।” (सूरह साफ्फात 102) बेटे के इस जवाब के बाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम अपने बेटे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम को जब मक्का से ज़बह करने के लिए लेकर चले तो शैतान ने मिना में तीन जगहों पर उन्हें बहकाने की कोशिश की, जिस पर उन्होंने सात सात कंकड़ियां उसको मारीं जिसकी वजह से वह ज़मीन में धंस गया। आखिर रज़ाए इलाही की खातिर हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अपने दिल के टुकड़े को मुंह के बल ज़मीन पर लिटा दिया, छुरी तेज की, आंखों पर पट्टी बांधी और उस वक़्त तक छुरी अपने बेटे के गले पर चलाते रह जब तक अल्लाह तआला की तरफ से यह आवाज़ गई इब्राहीम! तूनेख्वाबसचकरदिखाया, हमनेकलोगोंकोऐसाहीबदलादेतेहैं।” (सूरह साफ्फात 107) चुनांचे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम की जगह जन्नत से एक मेंढा भेज दिया गया जिसे हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम ने ज़बह कर दिया। इस वाक़्या के बाद से अल्लाह तआला की रज़ा के लिए जानवरों की क़ुर्बानी करना खास इबादत में शुमार हो गया, चुनांचे हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत के लिए भी हर साल क़ुर्बानी सिर्फ मशरू की गई बल्कि इसको इस्लामी शेआर बनाया गया और हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम की इत्तिबा में हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीकों पर जानवरों की क़ुर्बानी का यह सिलसिला कल क़यामत तक जारी रहेगा इंशाअल्लाह।

 

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)