बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला नबिय्यिल करीम व अला अलिहि व अस्हाबिहि अजमईन

70 साल बीतने के बाद भी शराब पर प्रतिबंध(पाबंदी) क्यों नहीं?

एक अरब पच्चीस करोड़ आबादी वाले भारत में सैकड़ों साल से विभिन्न (कई) धर्मों के मानने वाले लोग एक साथ रह रहे हैं, भारत में मौजूद सभी धर्मों में शराब पीना या तो हराम है या हानिकारक होने के कारण इससे बचने की शिक्षा दी गई है, किसी भी धर्म में शराब पीने की प्रेरणा (तरग़ीब) मौजूद नहीं है तथा स्वतंत्रता (आज़ादी) के बाद भारत के संविधान (दस्तूर) में लिखा गया है कि पूरे भारत में शराब पीने पर प्रतिबंध (पाबंदी) लगाने की कोशिश की जाए, लेकिन अफसोस की बात है कि देश की स्वतंत्रता (आज़ादी) के 70 वर्ष बीतने के बावजूद शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध आज तक नहीं लगाया जा सका, हाँ कुछ राज्यों में आज भी प्रतिबंध (पाबंदी) है, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराब पर पाबंदी लगाकर एक सराहनीय (क़ाबिल--सताइश) काम किया है, इस समय भारत के 13 राज्यों में भाजपा की सरकार है और चार राज्यों में भाजपा के समर्थन से दूसरी पार्टियों की सरकारें क़ाइम हैं, नोट बंदी, मांस (गोश्त) बंदी और तलाक बंदी जैसे मुद्दों पर तो भाजपा सक्रिय (सरगरम) है, लेकिन इन 17 राज्यों में से गुजरात के अलावा किसी भी प्रदेश में शराबबंदी नहीं है और यह प्रतिबंध (पाबंदी) भी भाजपा ने नहीं लगाया है बल्कि स्वतंत्रता के बाद यह प्रतिबंध (पाबंदी) चला आ रहा है, हालांकि हर विशेष (ख़ास) और आम जानता है कि भारत में बिकने वाली शराब आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, शराब न केवल पीने वालों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि वह आर्थिक, (इक़्तिस़ादी) पर्यावरण (मह़ौलयाती) और सामाजिक कई पहलुओं से भी देश के पूरे समाज को नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन शराब पर लगाए लगाए गए टैक्सों द्वारा बेतहाशा प्राप्त (हासिल) होने वाली राशि की वजह से राज्य सरकारें शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार नहीं हैं, अंग्रेजी अख़बार The Hindu के Business Line के अनुसार तमिलनाडु की शराब बनाने वाली केवल एक मशहूर कंपनी (Tasmac) ने 2012 में 22 हजार करोड़ रुपया तमिल सरकार को बतौर टैक्स अदा किया, केरल जहां सरकार की आय (आमदनी) का 22 प्रतिशत शराब नोशी से होता है में आठ हजार करोड़ रुपये शराब पर लगाए गए टैक्स द्वारा प्राप्त (ह़ासिल) होते हैंबहरहाल जिन राज्यों में शराब पर प्रतिबंध नहीं है वहाँ सरकार को आम लोगों के खून-पसीने की मेहनत से कमाई गई राशि (रक़म) का बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में मिलता है जो सरकार की कुल आय (पूरी आमदनी) का कमोबेश 20 प्रतिशत है

स्वतंत्रता के बाद लागू नियमों में से कुछ नियमों को केंद्रीय दर्जा ह़ासिल है जो पूरे भारत के लिए होते हैंदिल्ली केंद्र की सत्तारूढ़ (हुक्मुरां) पार्टी इसके कार्यान्वयन (निफ़ाज़) के लिए ज़िम्मेदार होती है, जबकि कुछ नियम राज्य अनुसार हैंजिसके बारे में हर राज्य अपनी खुद नीति (पॉलिसी) बनाकर उसे लागू करता हैगाय काटने और उसका मांस खाने का कानून भी राज्य अनुसार (State List) है, यानी हर राज्य सरकार अपने प्रदेश के लिए तय करने के लिए स्वतंत्र (आज़ाद) हैं, इसलिए कुछ राज्यों में स्वतंत्रता के बाद से ही गाय काटने और उसका मांस खाने और बेचने की पूरी अनुमति (इजाज़त) है, जबकि अन्य राज्यों में गाय काटने की अनुमति नहीं है, इसी तरह शराब भी राज्य के कानून के तहत आता है, इसलिए कुछ राज्यों जैसे गुजरात, बिहार, नागालैंड, मणिपुर और लकशदीप में आज भी शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध है, केरल में 2024 तक शराब पर पूर्ण (पूरी तरह) प्रतिबंध का लक्ष्य सामने रखकर 2014 आंशिक (जुज़्वी) प्रतिबंध लागू कर दिया गया है आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मिजोरम और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में भी कई बार शराब नोशी और उसकी खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध लागू रहा है साथ ही अधिकांश राज्यों में  21 साल से कम उम्र वाले व्यक्ति पर शराब पीने पर प्रतिबंध है कुछ राज्यों में 25 साल से कम उम्र वाले व्यक्ति पर शराब पीने पर प्रतिबंध है, जबकि कुछ राज्यों में यह उम्र 18 साल है, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय (इलाक़ाई) और धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भी शराब की दुकानें बंद रहती है

बहरहाल भारतीय कानूनों की आत्मा (रूह़) की मांग (तक़ाज़ा) है कि शराब नोशी और उसके व्यापार (कारोबार) पर पाबंदी लगाई जाए और भारत में मौजूद धर्मों की शिक्षाओं की मांग भी यही है कि शराब पर प्रतिबंध लगाया जाए, तीन त़लाक़ के बारे में क़ुरान पढ़े बिना क़ुरान की आयतों का ह़वाला देने वालों को चाहिए कि वह शराब के बारे में सभी धार्मिक शिक्षाओं ख़ास़कर क़ुरान व ह़दीस़ का अध्ययन (मुत़ाला) करें भारत में सबसे ज़्यादा हिंदू धर्म के मानने वाले लोग हैं, हिंदू धर्म की किताबों में लिखा है कि शराब पीना पाप (गुनाह) होने की वजह से प्रतिबंधित (मना) है और शराब पिने वालों को बड़ी सज़ा मिलनी चाहिए, अलबत्ता दवा के रूप शराब का उपयोग किया जा सकता हैभारत में दूसरे नंबर पर मुसलमान हैं, इस्लाम धर्म ने शराब पीने को ह़राम क़रार देकर शराब का कारोबार करने वालों, शराब के कारख़ानों में नौकरी करने वालों, शराब बेचने वालों, शराब पीने वालों यहां तक ​​कि किसी भी तरह से शराब के द्वारा आय प्राप्त करने वालों पर लानत भी फ़रमाई है शरीयत--इस्लामिया में शराब पीने को इंसान को मारने (हलाक करने) वाले सात बड़े पापों में से एक क़रार दिया गया सूरह अलमाइदा की आयत 90 में शराब पीने को अल्लाह तआला ने शैतानी काम क़रार देकर उससे दूर रहने की शिक्षा (तालीम) दी और फ़रमा दिया है कि शराब के क़रीब (पास) भी न जाओ बहरहाल क़ुरान व ह़दीस़ की रोशनी में पूरी उम्मत--मुस्लिमा सहमत (का इत्तिफ़ाक़) है कि शराब पीना ह़राम (मना) है, चाहे मात्रा कम ही क्यों न हो पहले शराब आमतौर पर कुछ चीजों जैसे अंगूर सड़ा कर बनाई जाती थी जिसको देसी शराब कहते हैं, अब नई टेक्नोलोजी द्वारा (ज़रिए) भी शराब तैयार होती है जिसको अंग्रेज़ी शराब कहती हैं, लेकिन शरई आधार (ऐतबार) से दोनों का एक ही आदेश (ह़ुक्म) है कि हर वह चीज़ जो नशा उत्पन्न (पैदा) करे उसका पीना ह़राम (मना) है जैसा कि क़ुरान करीम के मुफ़स्सिर--अव्वल (पहले मुफ़स्सिर) ह़ुज़ूर--अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: “हर नशा आवर (पैदा करने वाली) चीज़ ह़राम (मना) है (मुस्लिम)

ईसाई धर्म जो देश की आबादी का 2.3 प्रतिशत है, में शराब नोशी के बारे में दो राय हैं: एक राय के अनुसार शराब पीना ह़लाल है, लेकिन इतनी मात्रा में शराब पीना कि बुद्धि (अ़क़ल) चली जाए ग़लत है, ईसाई धर्म के मानने वाले अन्य हज़रात का मौक़िफ़ (रुख़) है कि शराब पीना पाप (गुनाह) है और इससे बचना ज़रूरी है, यहाँ तक कि कुछ ईसाई लोग चाय और कॉफी तक नहीं पीते, क्योंकि इसमें पदार्थ (मादा--) कैफ़ीन होता है, ईसाई धर्म में शराब निषेध (ह़ुरमत) की राय लेने (इख़्तियार करने) वाले पादरियों ने इंजीलसे ही साबित किया है कि शराब पीना ह़राम (मना) है और शराब के ह़लाल होने के काइलीन (कहने वालों) के तर्क (दलीलों) का मुदल्लल (दलीलों के साथ) जवाब भी दिया है जो उनकी किताबों में मौजूद हैभारत की आबादी का 1.7 प्रतिशत लोग सिख धर्म को मानने वाले हैं जिसकी शुरुआत गुरु नानक साहब ने पंजाब में थीसिख धर्म में शराब पीना सख़्त वर्जित (मना) है, बौद्ध धर्म के मानने वाले आमतौर पर शराब पीने से बचते हैं, क्योंकि इसमें नुकसानात बहुत ज्यादा हैंजैन धर्म के मानने वाले शराब नोशी के सख़्त खिलाफ हैं, क्योंकि उनकी धार्मिक शिक्षाओं के अनुसार अल्कोहल(Alcohol)के मशरूबात (पीने की चीज़ों) की बिल्कुल अनुमति (इजाज़त) नहीं हैबहरहाल भारत के संविधान के साथ गंगा जमुनी तहज़ीब वाले इस देश के निवासियों की धार्मिक शिक्षाओं में भी शराब से बचना है

शराब पीने के कुछ लाभ हैं, लेकिन कुल मिलाकर शराब पीने के नुकसान बहुत ज़्यादा हैं जैसा कि हम अपनी आँखों से ऐसे लोगों के हालात देखते हैं जो शराब पीने के आदी बन जाते हैं25 मई 2016 को The Indian Express में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार शराब की वजह से हर 96 वें मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है, इसी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े अपराध (जराइम) और दुर्घटनाएँ करने वाले अधिकांश (ज़्यादातर) लोग शराब पीने वाले लोग होते हैंइसी तरह महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और चोरी डकैती करने वाले लोग भी आमतौर पर शराबी होते हैंरिपोर्ट में तमिलनाडु में 30 साल से कम उम्र वाली महिलाएं बड़ी संख्या में विधवा होने की मूल (असल) कारण (वजह) शराब नोशी को बयान किया गया है, इसी अख़बार में अर्थशास्त्र (इक़्तिस़ादियात) के एक विशेषज्ञ (माहिर) का  विश्लेषण (तजज़िया) ज़िक्र किया गया है कि केरल के अस्पतालों में दाख़िल रोगीयों में से 25 प्रतिशत रोगी नशा के शिकार होते हैं, तथा अपराध करने वालों में 69 प्रतिशत लोग नशा की ह़ालत में होते हैं देश में ताजा हवा के लिए आवाज़ उठाई जाती है, लेकिन शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों के द्वारा जो वातावरण (फ़िज़ा) में प्रदूषण (आलूदगी) पैदा होती है वह लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हैउसके लिए कोई आवाज़ नहीं उठाई जाती

भारत के प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत सड़कों की दुर्घटनाएँ शराब नोशी की वजह से होती हैंNDTV की ख़बर के अनुसार भारत में हर चार मिनट में सड़क हादसे में एक आदमी मर जाता हैकेवल 2013 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या एक लाख सैंतीस हजार से अधिक है जो भारत की युद्ध में मरने वालों की कुल संख्या से भी कहीं अधिक हैयह तो वह संख्या है जो दस्तावेजों में दर्ज हैं, वास्तव (ह़क़ीक़त) में मरने वालों की संख्या इससे भी कहीं अधिक हो सकती है, हजारों लोग सड़क दुर्घटना का शिकार होकर हमेशा के लिए दूसरों के मोह़ताज बन जाते हैं, शराब की वजह से बढ़ रहे सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि राजमार्ग के 500 मीटर के दायरे में शराब बिक्री नहीं की जा सकती अनुमान लगाएँ कि शराब पीने की वजह से कितनी महिलाएं विधवा होती हैं, कितने बच्चे अनाथ (यतीम) हो जाते हैं, कितने बच्चे घर के अभिभावक (सरपरस्त) को खो देने के कारण शिक्षा से वंचित (ह़रूम) रह जाते हैंबहरहाल हमारा पूरा समाज शराब नोशी की वजह से पूरी तरह से प्रभावित है, कितने घरों शराब नोशी की वजह से रोज़ाना झगड़े होते हैं, शराब पीने वाले लोग घर के ज़रूरी खर्च पर शराब खरीद कर पीने को प्राथमिकता (तरजीह़) देते हैं, बच्चे भूख से लाचार हैं और बच्चों की शिक्षा के लिए फीस जमा नहीं की गई, लेकिन शराब के आदी घर के आवश्यक खर्च को छोड़कर शराब की दुकान पर जाकर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक शराब पीता है

तीन त़लाक़ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के साथ राजनीतिक सहानुभूति (हमदर्दी) व्यक्त (इज़हार) करने वालों को जानना चाहिए कि भारत की अदालतों से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार मुस्लिम महिलाओं की तुलना में हिंदू महिलाएँ त़लाक़ से कहीं अधिक प्रभावित हैं और यह बात रोज़े रौशन (दिन की रौशनी) की तरह स्पष्ट (साफ़) है कि त़लाक़ के मुक़ाबले में शराब नोशी की वजह से महिलाएँ अधिक प्रभावित हैं, शराब के नशे में चूर होकर शौहर उनकी पिटाई करता है, शराब पीकर ड्राइविंग करने के कारण हुए सड़क हादसों में कितनी महिलाएँ विधवा हो जाती हैं,महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने वाले अधिकांश (ज़्यादातर) लोग शराब पीने वाले होते हैं, इसीलिए भारत में शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए महिलाएँ सबसे आगे रहती हैं, लिहाज़ा महिलाओं के साथ सहानुभूति (हमदर्दी) यह नहीं कि तीन त़लाक़ के नाम पर राजनीति की जाए, बल्कि सच्ची सहानुभूति (हमदर्दी) यह है कि शराब पर पूरे तौर पर प्रतिबंध (पाबंदी) लगा करके महिलाओं की दिली तस्कीन (संतोष) का सामान प्रदान किया जाए

बेशक इंसान अपने कपड़े और खाने-पीने में स्वतंत्रता (आज़ादी) का इच्छुक (ख्वाहिशमंद) होता है, लेकिन दुनिया के नियम और शर्तों और सामूहिक जीवन कुछ हद तक उसकी इच्छा पर प्रतिबंध लगा देता है, अगर कोई व्यक्ति नंगे होकर सड़क पर घूमे तो उसके विरुद्ध (ख़िलाफ़) कार्यवाही की जाती है, ज़हर खाना क़ानूनन अपराध (जुर्म) है, गैर सेहही (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक) खाद्य पदार्थ (ग़िज़ाएं) उपलब्ध कराने वाले होटल बंद कर दिए जाते हैं, इसी तरह शराब के नुकसान व्यक्तिगत (इन्फ़िरादी) और सामूहिक (इज्तिमाई) इतने अधिक हैं कि वह पूरे समाज के लिए घातक (मोहलिक) साबित हो रहे हैं, इसलिए सरकार को चाहिए कि वह शराब के द्वारा प्राप्त होने वाली बड़ी राशि न देखकर आम लोगों के स्वास्थ्य, सुखद (ख़ुशगवार) जीवन और समाज को बेहतर बनाने के लिए शराबनोशी पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू करे, अगर तुरंत शराबनोशी पर पूर्ण (मुकम्मल तौर पर) प्रतिबंध लगाना मुश्किल ही तो सख़्त शर्तें लगाकर जुज़्वी पाबंदी लगाई जाए, ताकि देश को संविधान के अनुसार धीरे धीरे शराब मुक्त किया जा सके, अगर शराब के कारखानों और दुकानों पर क़ानूनी कार्यवाही शुरू कर दी जाए तो नियमों का पालन न करने के कारण कारखानों और दुकानों पर खुद ही ताले लग जाएंगे

डॉ॰ मुहम्मद नजीब क़ासमी संभली (www.najeebqasmi.com)