बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला नबिय्यिल करीम व अला अलिहि व अस्हाबिहि अजमईन

मैरी क्रिसमस कहकर मुबारकबाद पेश करना जायज़ नहीं

हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के बेटे नहींअल्लाह के

बरगुज़ीदा रसूल और नबी हैं

अल्लाह तआला ने इन्सानों की पैदाइश का जो उमूमी ज़ाब्ता बनाया हैवह यह है कि मर्द व औरत का निकाह करके सोहबत करना, उसके बाद अल्लाह के हुक्म से हमल ठहरना और विलादत का होना। अलबत्ता अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत से इस ज़ाब्ते के अलावा भी कुछ इन्सानों की तख़लीक़ की है। अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को इस तरह पैदा फ़रमाया कि उनकी पैदाइश में ना किसी मर्द का कोई दख़ल था, ना किसी औरत का। हज़रत हव्वा को चूंकि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पसली से पैदा किया था, इसलिए उनकी पैदाइश में मर्द का तो फ़िलजुम्ला दख़ल था, औरत का कोई दख़ल नहीं था। इसी तरह अल्लाह तआला ने अपनी क़ुदरत से हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को बाप के बग़ैर सिर्फ़ माँ (हज़रत मरियम बिन्त इमरान) से फ़लस्तीन के मशहूर शहर बैतुल्लहम’’ में पैदा फ़रमाया, जैसा कि अल्लाह तआला ने सूरह आले इमरान आयत 59 में बयान फ़रमाया कि अल्लाह के नज़दीक ईसा की मिसाल आदम जैसी है, अल्लाह ने उन्हें मिट्टी से पैदा कियाफिर उनसे कहा कि हो जाओ, बस हो गये।

क़ुरआन व हदीस की रोशनी में तमाम मुसलमानों का यह ईमान है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के रसूल और नबी हैं। क़ुरआने करीम में तकरीबन 25 जगहों पर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का नाम ज़िक्र हुआ है और उनको फांसी नहीं दी गई, बल्कि उन्हें आसमानों में उठा लिया गया और उन जैसे एक दूसरे शख़्स को फांसी दी गयी थी, जैसा कि सूरह अन्निसा आयत 157 और 158 में अल्लाह तआला ने ज़िक्र किया: उन्होंने ईसा को ना क़त्ल किया था, और ना उन्हें सूली दे पाये थे, बल्कि उन्हें इशतबाह हो गया था। ग़र्ज़ कि अल्लाह तआला ने वज़ाहत के साथ बयान फ़रमा दिया कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को सूली नहीं दी गई थी, बल्कि उन्हें ऊपर उठा लिया था। इस वाक़ये की पूरी तफ़सील नबी--अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बयान फ़रमायी है जो अहादीस में मौजूद है। कुछ हदीसों में है कि क़यामत से क़ब्ल हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का नुज़ूल दमिश्क के मशरिक में सफेद मिनार पर होगाऔर फिर उनकी सरपरस्ती में दुनिया के चप्पे चप्पे पर मुसलमानों की हुकूमत क़ायम होगी।

हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की तारीख़े विलादत के मुताअल्लिक कोई तहक़ीक़ी बात किसी भी मज़हब की मुस्तनद किताब में मौजूद नहीं है हत्ता कि ईसाइयों की किताब में भी यह ज़िक्र नहीं है कि 25 दिसम्बर को हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश हुई, लेकिन किसी दलील के बग़ैर ईसाइयों ने 25 दिसम्बर को हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की तारीख़े पैदाइश तसलीम कर ली है। हालांकि क़ुरआन व हदीस और इसी तरह बाईबिल से जो अन्दाज़ा होता है वह यह है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश गर्मी के मौसम में हुई थी। बाईबिल (बाब 2 आयत 8) में है कि जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम रात में पैदा हुए तो उस वक़्त चरवाहा अपनी भेड़ों को बाहर चरा रहा था। बैतुल्लहम में दिसम्बर के आख़िरी दिनों में इतनी बर्फ़बारी होती है कि कोई शख़्स अपने घर से भी बाहर नहीं निकल सकता और बाईबिल में है कि चरवाहा अपनी भेड़ों को बाहर चरा रहा था, दिसम्बर के महीने में बैतुल्लहम (फलस्तीन) में सख़्त बर्फ़बारी की वजह से रात के वक़्त भेड़ों को बाहर चराना मुमकिन ही नहीं है। नीज़ क़ुरआने करीम (सूरह मरियम आयत 25) में है कि अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश के फ़ौरन बाद हज़रत मरियम से कहा कि तुम खजूर के तने को अपनी तरफ़ हिलाओ, उसमें से पकी हुई ताज़ा खजूरें तुम पर झड़ेंगी, उसको खाओ। सारी दुनिया जानती है कि खजूरें सर्दियों के मौसम में नहीं बल्कि गर्मियों के मौसम में पकती हैं। इसके अलावा और मुताअद्दद दलाइल हैं जिनसे मालूम होता है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश गर्मियों में हुई।

ईसाइयों का यह अक़ीदा है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह तआला ने जना (मआज़ अल्लाह), यानि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह तआला के बेटे हैं, जिसकी सूरह मरियम में बहुत सख़्त अल्फाज़ के साथ अल्लाह तआला ने तरदीद की है: यह लोग कहते हैं कि अल्लाह तआला की कोई औलाद है, (ऐसी बात कहने वालो!) हक़ीक़त यह है कि तुम ने बड़े संगीन जुर्म का इरतेकाब किया है, कुछ बईद नहीं कि कि इसकी वजह से आसमान फट पड़ें, ज़मीन फट जायेऔर पहाड़ टूट टूट कर गिर पड़ेंकि लोगों ने अल्लाह तआला के लिए औलाद का दावा किया है, हालांकि अल्लाह तआला की यह शान नहीं है कि उसकी कोई औलाद हो। सूरह इख़लास में भी अल्लाह तआला ने वाज़ेह अल्फ़ाज में बयान कर दिया कि अल्लाह की ना कोई औलाद है और ना वह किसी की औलाद है। ग़र्ज़ कि क़ुरआन व हदीस की वाज़ेह तालीमात की रोशनी में तमाम मुसलमानों का यह अक़ीदा है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के बेटे नहीं हैं, बल्कि बशर हैं और इसमें कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता है।

ईसाई हज़रात 25 दिसम्बर को इस यक़ीन के साथ मैरी क्रिसमस मनाते हैं कि 25 दिसम्बर को अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को जन्म दिया नऊज़ु बिल्लाह। हम उनके मज़हब में कोई मुदाख़लत नहीं करना चाहते, लेकिनहमारा यह दीनी फरीज़ा है कि इस मौक़े पर मुन्अक़िद होने वाली उनकी मज़हबी तक़रीबात में शिरक़त ना करें और ना किसी शख़्स को मैरी क्रिसमस कहकर मुबारकबाद पेश करें, क्योंकि यह जुमला क़ुरआन व हदीस की रूह के सरासर ख़िलाफ है। हाँ अगर आपका कोई पड़ोसी या साथी ईसाई है और वह इस मौक़े पर मैरी क्रिसमस कहता है तो आप ख़ुश उसलूबी के साथ दूसरे अल्फाज़ (मसलन शुक्रिया) कहकर किनाराकशी इख़्तियार कर लें, क्योंकि जिस अक़ीदे के साथ मैरी क्रिसमस मनाया ज़ाता है वह क़ुरआनी तालीमात के सरासर ख़िलाफ है। आपको अपने पड़ोसी या साथी की फ़िक्र हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ अल्लाह की नाराज़गी और सख़्त अज़ाब का भी मामला है, इसलिए वाज़ेह अल्फाज़ में उनसे कह दिया जाये कि हमारा यह अक़ीदा है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम बावजूद कि एक बरगुज़ीदा रसूल और नबी हैं, वह अल्लाह के बेटे नहीं। इसलिए इस मौक़े पर मुन्अक़िद होने वाली तक़रीबात में शिरकत से मआज़रत ख़्वाह हैं।

डॉ॰ मुहम्मद नजीब क़ासमी संभली (www.najeebqasmi.com)